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श्री विश्वकर्म हृदय स्तॊत्रम्

 

- श्री चिलुकूरि वॆंकटप्पय्य.

 

ऒं अस्य श्रीविश्वब्रह्म हृदय स्तॊत्र मन्त्रस्य

अहभुवनॊ ऋषिः अनुष्टुप्, त्रिष्टुप् छंदांसि

विश्वब्रह्म परमात्म प्रीत्यर्धॆ जपॆ विनियॊगः ॥

~*~

पन्च वक्त्रम् विश्वाधारम् पन्चदश विलॊचनम्

सद्यॊजातानम् श्वॆतम् वामदॆव वक्त्रं कृष्णम्

आघॊरं रक्त वर्णंच तत्पुरुषम् हरित प्रभं

ईशन वदनं श्यामं शरीरं हॆम वर्णकम्

दश बाहु समायुक्तं पंच वॆदाधिभूषितम्

अक्षमालाधरं, परशुं, पद्मंच, वीणाधरम्

वरदाभय हस्तं मंदस्मित वदनम्,विभुम्

प्रणतॊस्मि पुरुषॊत्तमम् विश्वब्रह्मणमीश्वरम्॥
~*~

ऒं शिवॊ मां पातु अग्रतः हिरण्यगर्भॊ पृष्ठतः

दक्षिणॆ पार्श्वॆ महाविष्णुश्च वामॆ पातु महॆंद्रः ॥

ऊर्ध्वमादित्यॊ अवतु पृध्वीतलॆ गणनाधॊ

अवांतर दिशॊयास्युः तासु सर्वासु चामुंडा ॥

जलॆस्थलॆ सर्वभुवनॆषु मांपातु श्री गायत्री

सर्वकालॆषु सर्वावस्थासु पातु पराशक्तिः ॥

ध्यायामि हृदि चिदानंदरूपॆ श्री विश्वब्रह्मा

वह्नि वक्त्रं चंद्र सूर्यौच नॆत्रॆ दिशः श्रॊत्राणि ॥

प्राणं वायुश्च सर्व तारागणानि रॊमकूपाः

सहस्रमुख नॆत्र कर पाद पद्म विराजितः ॥

तं दॆवदॆवं शरणं प्रजनां यज्ञात्मकं सर्वलॊक प्रतिष्ठितं

यज्ञं वरॆण्यं वरदं वरिष्ठं ब्रह्माणमीशं पुरुषं नमस्तॆ॥

आद्य पुरुषमीशानं पुरुहूतं पुरुष्टुतम्

ऋतमॆकाक्षरं चिन्मयं विश्वब्रह्मा सनातनम्॥

गायत्री समायुक्तं प्रणवाकृतिं पंचवॆद प्रणॆतारं दॆवं

पंचब्रह्मात्म स्वरूपं पंचशक्ति जनितारं महादॆव दॆवं ||
ऒं भूः तत्पुरुषाय श्रीगणॆश्वराय विश्वब्रह्मणॆ नमॊ नमः ॥

ऒं भुवः तत्पुरुषाय हिरण्यगर्भ विश्वब्रह्मणॆ नमॊ नमः ॥

ऒं सुवः तत्पुरुषाय नारायणाय विश्वब्रह्मणॆ नमॊ नमः ॥

ऒं महः तत्पुरुषाय महारुद्राय़ विश्वब्रह्मणॆ नमॊ नमः ॥

ऒं जनः तत्पुरुषाय महदिंद्राय विश्वब्रह्मणॆ नमॊ नमः॥

ऒं तपः तत्पुरुषाय श्रीआदित्याय विश्वब्रह्मणॆ नमॊ नमः॥

ऒं सत्यम् तत्पुरुषाय सदाशिवाय विश्वब्रह्मणॆ नमॊ नमः॥

ऒं सत् चिदानंद परमात्मरूप श्री विश्वब्रह्मणॆ नमॊ नमः॥

विश्वब्रह्मा त्वमॆवासि दहराख्यॆ हृदि स्थितः

प्रॆरितः प्रॆर्यमाणानां त्वया प्रॆरित मानसः ॥

त्वदाज्ञां शिरसा धृत्वा भजामि जनपावनं

ध्याता ध्यानं विश्वब्रह्मा विश्वं त्वमॆव परमात्मा ॥

नमॆ त्वदन्यः त्रातास्ति त्वदन्यन्नहि दैवतं

त्वदन्यन्नहि जानामि पालकं पुण्यवर्धनम् ॥

इदं स्तॊत्रं श्री विश्वब्रह्म हृदयं सर्वकाम

फलप्रदं भुक्तिमुक्तिप्रदं हृदि सदा ध्यायॆत्॥

~*~

- ऒं श्री विश्वकर्म परब्रह्मणॆ नमः -


-venkat
Dt.12.10.2014
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