Poetic Verses

परी

बचपन में
माँ रख देती थी चाकलेट
तकिये के नीचे
कितना खुश होता
सुबह-सुबह चाकलेट देखकर
माँ बताया करती
जो बच्चे अच्छा काम
करते हैं
उनके सपनो में परी आती
और देकर चली जाती चाकलेट
मुझे क्या पता था
वो परी कोई नहीं
माँ ही थी।
***कृष्ण कुमार यादव ***



Comment On This Poem --- Vote for this poem
परी

10,334 Poems Read

Sponsors